Tuesday, July 6, 2010

inspiration

आज अपनी बात को शब्दों का सहारा लेकार उनके प्यार को कुछ समझाने भर की कोशिस है ..............
बात की शुरुआत इन चंद लाइनों से -
"जब भी कोई ख्याल दिल से टकराता है !
दिल न चाहकर भी खामोश रह जाता है !!
कोई सब कुछ कहकर प्यार जताता है !
कोई कुछ न कहकर भी सब बोल जाता है !!"
रिश्ता चाहे प्रेम का हो या दोस्ती का कुछ बातें अकसर बिन कहे ही समझ में आ जाता है ।जो भी ख्याल दिल में पनपते हैं, वो आँखों से या किसी न किसी रूप में बयां हो जाते हैं । अगर सीधे शब्दों में कहें तो दिल का मतलब आत्मा से है जो की शाश्वत और अमर है । बिल्कुल प्रेम की तरह। प्रेम भी शाश्वत और अमर है । इसीलिए तो प्रेम और दोस्ती में सच्चाई और ईमानदारी है। प्रेम इसके बिना अधुरा है । प्रेम को अगर हम भगवान कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । क्योंकि अत्मा ही प्रेम का घर है और आत्मा तो शाश्वत है । और भगवान भी शास्वत है । तो इन सम्बन्धो का आधार ही शाश्वत है । इसी लिए तो सच्चाई अपने आप ही बयाँ हो जातीं हैं
। आज हम प्रेम को दफ़नाने की कोशीश में लगे रहतें हैं- कभी धर्म के नाम पार, तो कभी जात , कभी गोत्र के नाम पार आखिर कब तक ?
आज हम दिल में उठने वाले ख्यालों को ही कुचल देतें हैं । सच्चाई का वध कर देतें हैं । अपने दिल में आने वाले इन प्यार को ही कुचल देतें हैं । जबान पे बात आने से पहले ही ख़त्म हो जाती है ।
तो आइये इस अँधेरी दुनियां से ऊपर उठे और प्रेम की एक नयी दुनियां में चलें । जहाँ सब कुछ बयाँ हो बिना कुछ कहे ही मालूम हो जाये । फिर बिना कुछ कहे प्यार को जताएं और जीवन की शाश्वतता में खो जाएँ । शाश्वतात ही इश्वर है और वो पूर्ण है । तो हम अपूर्ण क्यूँ रहें ?
विजय कुमार

1 comment:

  1. भहुत शानदार लिखा है, यह आम आदमी को मालूम होना चाहिए की उन लोंगो पर क्या गुजरी होगी

    साधना न्यूज़ इंदौर

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